
मुंबई की राजनीति में भूचाल मच गया है। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) ने भाजपा की पार्षद रितु तावड़े के बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) के मेयर पद पर निर्विरोध चुने जाने को मराठी मानुस की पहचान पर सीधी चोट करार दिया है। पार्टी के मुखपत्र ‘सामना’ के संपादकीय में इसे महाराष्ट्र के लिए काला दिन बताया गया, जो मराठी दिलों को चुभता है।
शिवसेना-यूबीटी का आरोप है कि सत्ताधारी भाजपा उद्योगपतियों और धनकुबेरों के हित साध रही है। बड़े कारोबारों के लिए जमीन हथियाना आसान हो जाएगा, जबकि स्थानीय मराठी निवासियों की उपेक्षा होगी। संयुक्त महाराष्ट्र आंदोलन के दौरान मोरारजी देसाई की क्रूरता का जिक्र करते हुए कहा गया कि भाजपा उसी तरह मुंबई के हौसले को कुचल रही है।
संपादकीय में खुलासा किया गया कि भाजपा ने मराठी वोटरों में फूट डालकर सत्ता हथियाई और पैसों की बारिश कर मेयर पद हासिल किया। यदि शिवसेना को कमान मिलती तो मुंबई की लूट रुक जाती। रितु तावड़े के गड्ढामुक्त, भ्रष्टाचारमुक्त और महिलाओं के लिए सुरक्षित मुंबई के वादों को हास्यास्पद ठहराया।
महिलाओं की सुरक्षा पर गृहमंत्री देवेंद्र फडणवीस की विफलता बताई गई, बांग्लादेशी और रोहिंग्या घुसपैठ का मुद्दा उठाया। चार साल के प्रशासक राज में ‘गुजरात लॉबी’ ने बीएमसी का खजाना लूटा। करोड़ों के फर्जी बिल बनाए गए, जिनका कटा शहरी विकास को भेजा। मेयर को इस भ्रष्टाचार का खुलासा करना चाहिए, वरना विपक्ष संभालेगा।
इस घटना से मुंबई महानगरपालिका में नई जंग छिड़ने के संकेत मिले हैं, जहां मराठी गौरव और विकास की लड़ाई तेज होगी।