
भारत ने 2024 को आधार वर्ष बनाकर नई उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) सीरीज जारी कर दी है। मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंत नागेश्वरन का कहना है कि यह बदलाव उपभोक्ताओं के खर्च के पैटर्न को सटीक रूप से दर्शाता है, जिससे गरीबी का आकलन और नीतिगत फैसले बेहतर होंगे।
नई सीरीज से स्पष्ट है कि लोग भोजन-पेय पर कम और शिक्षा, स्वास्थ्य, यात्रा व इंटरनेट जैसी सेवाओं पर अधिक खर्च कर रहे हैं। नागेश्वरन ने इसे आय व उत्पादकता में वृद्धि का संकेत बताया।
सरकार व रिजर्व बैंक को अब आर्थिक बदलावों के अनुरूप सही निर्णय लेने में आसानी होगी। जनवरी में महंगाई 2.75 प्रतिशत रही—ग्रामीण इलाकों में 2.73 और शहरी में 2.77 प्रतिशत। खाद्य महंगाई पुरानी सीरीज के नकारात्मक से उलट 2.1 प्रतिशत हो गई।
खाद्य वस्तुओं का वेटेज घटाने से महंगाई में उतार-चढ़ाव कम होगा, जिससे महंगाई भत्ता व सरकारी खर्च स्थिर रहेंगे। इससे बजट निर्माण सरल होगा।
सांख्यिकी मंत्रालय ने सीरीज जारी की, जिसमें छह के बजाय 12 समूह हैं। वस्तुओं की संख्या 299 से 358 हो गई—308 वस्तुएं, 50 सेवाएं। यह एचसीईएस 2023-24 पर आधारित है।
मंत्रालय के सचिव सौरभ गर्ग ने हर पांच साल आधार बदलने की योजना बताई। अगला सर्वे 2027-28 में होगा। यह कदम अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाएगा।