
कोच्चि। केरल हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को एक महत्वपूर्ण जनहित याचिका पर जवाब दाखिल करने के लिए दो सप्ताह का अंतिम समयसीमा तय की है। यह याचिका 1977 में केरल विश्वविद्यालय की कीमती जमीन को तिरुवनंतपुरम में एकेजी सेंटर फॉर रिसर्च एंड स्टडीज के लिए आवंटित करने के फैसले को चुनौती देती है।
मुख्य न्यायाधीश सौमेन सेन और न्यायमूर्ति वीएम श्याम कुमार की पीठ ने गुरुवार को सुनवाई के दौरान साफ कर दिया कि अब और कोई ढील नहीं दी जाएगी। यह केंद्र पहले सीपीआई-एम का राज्य मुख्यालय था, जहां पार्टी के बड़े आयोजन होते थे।
याचिकाकर्ता, जो विश्वविद्यालय के पूर्व संयुक्त रजिस्ट्रार रह चुके हैं, ने मूल आवंटन की वैधता पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने बताया कि सरकारी आदेश में केवल 15 सेंट जमीन की अनुमति थी, लेकिन वर्तमान में लगभग 55 सेंट पर कब्जा है, जिसमें विश्वविद्यालय और सरकारी भूमि शामिल है।
विशेष सरकारी वकील ने 1977 के आदेश को खोजने के लिए समय मांगा, जो ग्राम पंचायत, कलेक्टरेट और पुरातत्व विभाग के रिकॉर्ड में नहीं मिला। मुख्य न्यायाधीश ने टिप्पणी की, “पहले भी समय दिया गया, यह आखिरी है।”
पीठ ने दो सप्ताह का समय देते हुए तीन सप्ताह बाद सुनवाई निर्धारित की। विवादित स्थल पर बहुमंजिला भवन है, जो पार्टी कार्यालय और सभागार के रूप में जाना जाता था। पिछले साल पार्टी ने नया भवन बनाकर कार्यालय स्थानांतरित किया, जिससे मामला फिर गरमाया।
यह विवाद केरल की राजनीतिक और प्रशासनिक पारदर्शिता पर सवाल उठाता है। अदालत का फैसला ऐतिहासिक आवंटनों की समीक्षा का मार्ग प्रशस्त कर सकता है।