
नई दिल्ली। ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (एआईएमपीएलबी) ने केंद्र सरकार के नोटिफिकेशन पर कड़ा ऐतराज जताया है, जिसमें सरकारी आयोजनों, स्कूलों और समारोहों में राष्ट्रगान से पहले ‘वंदे मातरम’ के सभी छह छंदों का गायन या पाठ अनिवार्य किया गया है। बोर्ड ने इसे संविधान विरोधी, धार्मिक स्वतंत्रता पर प्रहार और धर्मनिरपेक्षता का अपमान करार दिया।
बोर्ड के महासचिव मौलाना मोहम्मद फजलुर रहीम मुजद्दिदी ने बयान जारी कर कहा कि यह आदेश मुसलमानों की आस्थाओं के विरुद्ध है। उन्होंने रवींद्रनाथ टैगोर की आपत्तियों और संविधान सभा की बहसों का हवाला देते हुए बताया कि केवल पहले दो छंद ही स्वीकार्य हैं, क्योंकि बाकी में दुर्गा आदि देवी-देवताओं की आराधना का उल्लेख इस्लाम के तौहीद सिद्धांत से टकराता है।
मौलाना ने जोर देकर कहा कि धर्मनिरपेक्ष शासन किसी एक धर्म की प्रथाओं को दूसरों पर थोप नहीं सकता। यह सुप्रीम कोर्ट के फैसलों के विरुद्ध है, जहां गीत के कुछ भागों को अस्वीकार किया गया। पश्चिम बंगाल चुनावों से पहले यह राजनीतिक चाल है, लेकिन मुसलमान इसे कदापि नहीं मानेंगे।
एआईएमपीएलबी ने नोटिफिकेशन वापसी की मांग की, वरना अदालत में चुनौती दी जाएगी। अनुच्छेद 25 के तहत धार्मिक अधिकार अक्षुण्ण हैं। नोटिस में 3 मिनट 10 सेकंड के पूर्ण संस्करण को राष्ट्रपति समारोहों से लेकर स्कूलों तक अनिवार्य किया गया है, खड़े होकर सम्मान आवश्यक। यह विवाद राष्ट्रप्रतीकों और अल्पसंख्यक अधिकारों पर गहन बहस छेड़ रहा है।