
मुंबई के शेयर बाजार में गुरुवार को आईटी क्षेत्र में जबरदस्त बिकवाली का दौर चला, जिसके चलते निफ्टी आईटी इंडेक्स 5.51 प्रतिशत लुढ़क गया और चार महीने के निचले स्तर पर पहुंच गया। निवेशकों में एआई तकनीक के बढ़ते असर और अमेरिका में ब्याज दरों में जल्द कटौती की उम्मीदों के धुंधले पड़ने से चिंता का माहौल है।
निफ्टी आईटी कंपनियों की कुल मार्केट कैप घटकर 27,32,579 करोड़ रुपये रह गई, यानी करीब 1.6 लाख करोड़ रुपये का भारी नुकसान। प्रमुख सॉफ्टवेयर कंपनियों के शेयरों में 5.5 प्रतिशत से अधिक की कमी देखी गई। टीसीएस का शेयर 5.48 प्रतिशत गिरकर 2,750 रुपये पर बंद हुआ, जो 52 सप्ताह का सबसे निचला स्तर है। इंफोसिस में भी इतनी ही गिरावट दर्ज हुई।
टेक महिंद्रा 6.40 प्रतिशत नीचे आया, वहीं एचसीएल टेक, एमफैसिस और विप्रो में 4.5 से 5 प्रतिशत तक की कमी आई। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, उन्नत एआई टूल्स पारंपरिक आईटी सेवाओं को चुनौती दे रहे हैं, जिन पर भारतीय कंपनियों की कमाई का बड़ा हिस्सा निर्भर है।
हाल ही में लॉन्च हुए एंथ्रोपिक के ‘क्लॉड कोवर्क’ एआई टूल को व्यावसायिक प्रक्रियाओं को पूरी तरह स्वचालित करने वाला बताया जा रहा है। यह कई चरणों वाले कार्यों को एकल प्लेटफॉर्म से संभाल सकता है, जिससे पुराने सॉफ्टवेयर की मांग घट सकती है।
जेफरीज ब्रोकरेज ने इसे ‘सासपोकैलिप्स’ करार दिया है, जबकि कुछ विशेषज्ञ 40 प्रतिशत तक राजस्व में कमी की आशंका जता रहे हैं। अमेरिकी रोजगार आंकड़ों में 1.3 लाख नई नौकरियां जुड़ने और बेरोजगारी दर 4.3 प्रतिशत पर आने से फेड के रेट कट की उम्मीदें कम हुईं।
मोटीलाल ओसवाल का मानना है कि एआई पुरानी सॉफ्टवेयर और टेस्टिंग सेवाओं को अप्रासंगिक बना सकता है। आईटी क्षेत्र को अब नई तकनीक अपनाने की जरूरत है।