
सुप्रीम कोर्ट ने आंध्र प्रदेश के बहुचर्चित शराब घोटाले में केंद्रीय आरोपी कासिरेड्डी राजशेखर रेड्डी की नियमित जमानत याचिका को ठुकरा दिया है। यह घोटाला करीब 3200 से 3500 करोड़ रुपये का माना जा रहा है, जिसमें शराब नीति की खामियों का फायदा उठाकर शेल कंपनियों के जरिए भारी भरकम लेन-देन किए जाने का आरोप है।
चीफ जस्टिस की अगुवाई वाली बेंच ने सुनवाई में साफ लफ्जों में कहा कि यह मामूली अपराध नहीं, बल्कि विशाल भ्रष्टाचार का केन्द्र है जो बिना नौकरशाही और राजनेताओं की सांठगांठ के मुमकिन नहीं। शेल कंपनियों में जमा 750 करोड़ रुपये का सीधा कनेक्शन आरोपी से जोड़ता प्रथम दृष्टया प्रमाण मौजूद हैं। जमानत मिलने से जांच प्रभावित हो सकती है, इसलिए कोई गुंजाइश नहीं बनी।
कोर्ट ने कुछ अधिकारियों की विशेषाधिकार वाली गलतफहमी पर भी चुटकी ली। वकील रंजीत कुमार ने याचिका वापस लेने की इजाजत मांगी, जो मान ली गई। हालांकि, ट्रायल कोर्ट या हाईकोर्ट में बाद में नई याचिका दायर करने की छूट दी गई।
यह फैसला आंध्र प्रदेश में चल रही जांच को नई ताकत देता है, जहां अन्य आरोपी भी जमानत के लिए कोशिशें कर रहे हैं। हाईकोर्ट के फैसले में हस्तक्षेप न करने से मुख्य आरोपी की हिरासत पक्की हो गई। शराब नीति जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में पारदर्शिता की जरूरत अब और प्रबल हो गई है।