
बांग्लादेश में वोटिंग शुरू हो चुकी है, लेकिन हिंसा और धांधली की खबरों के बीच भारत सतर्क नजरें जमाए हुए है। चुनाव आयोग के अनुसार दोपहर तक 32.88 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। 42,651 में से 32,789 मतदान केंद्रों से डेटा आया, जहां 299 सीटों पर शांति बनी रही।
शेख हसीना की सरकार गिरने के बाद दोनों देशों के रिश्ते ठंडे पड़ गए। मुहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार पाकिस्तान और चीन के करीब आ गई, जिससे भारत-विरोधी नीतियां सामने आईं। भारत ने हमेशा लोकतंत्र की बहाली और निष्पक्ष चुनाव की वकालत की है।
सर्वे में बीएनपी आगे थी। जीत किसकी हो, भारत के लिए सीमा सुरक्षा सबसे बड़ा मुद्दा है। 4,000 किमी लंबी सीमा पर अवैध घुसपैठ, तस्करी और नकली नोटों का खतरा बरकरार है। स्थिर बांग्लादेश ही सीमाओं को मजबूत करेगा।
यूनुस राज में कट्टरपंथियों की रिहाई और आईएसआई की सक्रियता चिंता बढ़ा रही। हसीना काल के आतंकवाद-रोधी सहयोग को भारत दोहराना चाहता है। आर्थिक रूप से एक्ट ईस्ट नीति के लिए बांग्लादेश अहम है, जहां व्यापार से ऊर्जा तक सहयोग फला-फूला।
अस्थिरता 1971 से चले साझे प्रयासों को बर्बाद कर देगी। भारत बीएनपी की जीत की उम्मीद कर रहा, क्योंकि जमात से ज्यादा सहज संबंध संभव। फिर भी, पूर्व गठबंधनों से सबक लेते हुए सतर्क रहेंगे।