
नई दिल्ली में बजट सत्र के दौरान लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के बयानों ने राजनीतिक तापमान को चरम पर पहुंचा दिया। एनडीए के नेताओं ने एक स्वर में राहुल पर बिना आधार के आरोप लगाने, संसद की पवित्रता को ठेस पहुंचाने और परंपराओं का अपमान करने का आरोप लगाया।
केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने कहा कि गरिमामयी पद पर आसीन व्यक्ति को अपनी जिम्मेदारी निभानी चाहिए। उन्होंने विशेषाधिकार प्रस्ताव का जिक्र करते हुए कहा कि ऐसी निरर्थक बातें सदन के लिए स्वीकार्य नहीं।
केंद्रीय मंत्री बीएल वर्मा ने विपक्ष की आलोचना की। बजट सत्र महत्वपूर्ण है, लेकिन विपक्ष सदन और अपनी गरिमा की अनदेखी कर व्यवधान पैदा कर रहा है। यह बजट सभी के हित में है।
रामदास आठवले ने स्पीकर को धमकी देने को अभूतपूर्व बताया। राहुल के बयान बिना आधार के होते हैं, जो अस्वीकार्य हैं।
जेडीयू के संजय जha ने किताब विवाद का हवाला देकर कहा कि राहुल खुद को कानूनों से ऊपर समझते हैं और लोकसभा को बंधक बनाने की कोशिश कर रहे हैं।
भाजपा सांसद रेखा शर्मा ने राहुल को सदन बाधित करने और झूठ फैलाने वाला बताया। रवि किशन ने इसे लोकतंत्र के लिए खतरा माना।
शशांक मणि ने गैरहाजिर लोगों पर बेबुनियाद हमलों का जिक्र किया। मदन राठौड़ ने विदेशी आलोचना को देशविरोधी करार दिया। दिनेश शर्मा ने संसदीय नियमों का पालन सुनिश्चित करने की बात कही।
यह विवाद संसदीय कार्यवाही को प्रभावित कर रहा है, जो भविष्य की राजनीति को आकार दे सकता है।