
बांग्लादेश में संसदीय चुनावों के दौरान भारत के राजनीतिक दलों के नेताओं ने अपनी प्रतिक्रियाएं दी हैं। लोकतांत्रिक प्रक्रिया की कमजोरी और अल्पसंख्यक समुदायों, विशेषकर हिंदुओं पर बढ़ते अत्याचारों को लेकर चिंता व्यक्त की गई है। नई दिल्ली से उठी ये आवाजें पड़ोसी देश की दिशा को प्रभावित करने वाली हैं।
भाजपा विधायक बालमुकुंदाचार्य ने भविष्य की सरकार को शुभकामनाएं दीं, लेकिन चरमपंथी गतिविधियों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि जिहादी तत्वों ने लोकतंत्र को कमजोर करने और नेताओं पर हमले किए हैं। सांसद नरेश बंसल ने अल्पसंख्यकों पर अत्याचार रुकवाने की मांग की, शांतिपूर्ण मतदान की कामना की।
मुख्तार अब्बास नकवी ने बांग्लादेश को क्रूर ताकतों का जंगल बताया, संवेदनशील शासन की जरूरत बताई। विधायक विक्रम रंधावा ने हिंदू टारगेट किलिंग को गंभीर बताया। पूर्व डीजीपी एसपी वैद ने सभी नागरिकों की सुरक्षा चाही।
शिवसेना की शाइना एनसी ने बांग्लादेशी-रोहिंग्या घुसपैठियों पर निशाना साधा, मुंबई जैसे शहरों में बोझ बताया। कांग्रेस सांसद सुखदेव भगत ने सांस्कृतिक विरासत के विपरीत कट्टरता पर दुख जताया। राकेश सिन्हा ने सांस्कृतिक संरक्षण पर जोर दिया।
प्रियंका चतुर्वेदी ने हिंदू हमलों पर सरकार की चुप्पी की आलोचना की। सीपीआई(एम) के वी. शिवदासन ने लोकतांत्रिक ताकतों की जीत की भविष्यवाणी की। राजस्थान मंत्री जवाहर सिंह बेढम ने हिंदू विरोधी विचारों की निंदा की।
एनसी के जावेद हसन बेग ने नफरत की राजनीति को कोसा, जबकि मोहम्मद यूसुफ तारीगामी ने चुनाव के अधिकार पर बल दिया। ये प्रतिक्रियाएं बांग्लादेश के लिए लोकतंत्र और सुरक्षा का संदेश देती हैं।