
कोलकाता। पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और निर्वाचन आयोग के बीच विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा। राज्य सरकार ने SIR के लिए 8,505 ग्रुप-बी अधिकारियों की नियुक्ति की थी, लेकिन गुरुवार सुबह तक आयोग को इनके विस्तृत विवरण नहीं मिले।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) कार्यालय के सूत्रों के अनुसार, आयोग ने सभी 8,505 अधिकारियों के ग्रुप-बी पद की प्रामाणिकता पर संदेह जताते हुए विस्तृत जानकारी मांगी थी। ड्राफ्ट मतदाता सूची पर दावों-आपत्तियों की सुनवाई 14 फरवरी को समाप्त होने वाली है, ऐसे में इन अधिकारियों की भागीदारी मुश्किल दिख रही है।
सूत्रों का कहना है कि 14 से 21 फरवरी तक दस्तावेज सत्यापन में कुछ शामिल हो सकते हैं, बशर्ते सरकार उनकी पहचान स्पष्ट करे। लिस्ट में ऊपरी प्रभाग लिपिक, टाइपिस्ट तक के नाम और एक सेवानिवृत्त कर्मचारी का उल्लेख मिला है। आयोग ने राज्य सरकार और संबंधित विभागों से पृष्ठभूमि विवरण मांगे हैं।
अंतिम मतदाता सूची 28 फरवरी को जारी होगी। उसके ठीक बाद 29 फरवरी से आयोग की पूरी बेंच कोलकाता पहुंचेगी, जो SIR के बाद स्थिति का मूल्यांकन करेगी। इसके बाद विधानसभा चुनाव की तिथियां घोषित हो सकती हैं। यह देरी चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित कर सकती है।