
अमेरिका में जलवायु नीति को लेकर भारी हलचल मच गई है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का प्रशासन इस सप्ताह 2009 के ‘एंडेंजर्मेंट फाइंडिंग’ को रद्द करने की घोषणा करने जा रहा है, जो ओबामा काल की प्रमुख पर्यावरण नीति का आधार था।
यह वैज्ञानिक निर्णय ग्रीनहाउस गैसों जैसे सीओ2 को स्वास्थ्य और कल्याण के लिए खतरा मानता था। इसी के दम पर ईपीए ने वाहनों, उद्योगों और बिजली संयंत्रों पर उत्सर्जन नियंत्रण लागू किए। ट्रंप पक्ष का तर्क है कि इससे 1.3 ट्रिलियन डॉलर की बचत होगी और ऊर्जा क्षेत्र को बल मिलेगा।
व्हाइट हाउस ने इसे ऐतिहासिक डिरेगुलेशन बताया, जो अमेरिकी ऊर्जा प्रभुत्व सुनिश्चित करेगा। व्यवसाय जगत इसका स्वागत कर रहा है।
विपक्ष में वैज्ञानिक और पर्यावरण संगठन सतर्क हैं। एनआरडीसी जैसे समूहों का कहना है कि इससे प्राकृतिक आपदाओं का खतरा बढ़ेगा और लाखों लोगों पर बुरा असर पड़ेगा। कई नियम इसी आधार पर टिके हैं, जिनका आधार कमजोर हो जाएगा।
कानूनी लड़ाई की तैयारी हो रही है। यह कदम अमेरिकी जलवायु रणनीति को नया मोड़ दे सकता है, जहां आर्थिक हित पर्यावरण से टकरा रहे हैं।