
नई दिल्ली में फिक्की कैस्केड के चेयरमैन अनिल राजपूत ने वैश्विक तस्करी के खिलाफ एकजुटता का नया आह्वान किया है। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र से 11 फरवरी को ‘अंतरराष्ट्रीय तस्करी विरोधी दिवस’ घोषित करने की मांग की है, ताकि दुनिया भर में इस खतरे के प्रति जागरूकता फैले और सभी देश मिलकर कार्रवाई करें।
राजपूत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि तस्करी न केवल भारत बल्कि पूरी दुनिया में तेजी से बढ़ रही है। यह अर्थव्यवस्थाओं को कमजोर कर रही है और सुरक्षा को खतरे में डाल रही है। ’11 फरवरी को एक वैश्विक दिवस बनाने से तस्करी के खिलाफ सामूहिक आवाज बुलंद होगी,’ उन्होंने जोर देकर कहा।
राष्ट्रीय राजधानी में आयोजित फिक्की कैस्केड के कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने भारत की प्रगति पर प्रकाश डाला। देश ने 42 आपसी सीमा शुल्क सहयोग समझौते किए हैं और 21 अन्य पर प्रमुख व्यापारिक भागीदारों के साथ चर्चा जारी है। इससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तस्करी रोकने का जाल मजबूत हुआ है।
केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआईसी) के सदस्य मोहन कुमार सिंह ने प्रवर्तन की नई दिशा बताई। उन्होंने घटना-आधारित जब्ती से आगे बढ़कर नेटवर्क-आधारित व्यवधान पर जोर दिया। ‘वित्तीय प्रवाह, लॉजिस्टिक्स और अवैध नेटवर्क को तोड़ना जरूरी है,’ उन्होंने कहा।
तस्करी अब तकनीक से संचालित संगठित अपराध बन चुकी है, जो राष्ट्रीय सुरक्षा पर सीधा असर डालती है। हालिया बजट में एआई-आधारित इमेज विश्लेषण और बंदरगाहों पर कंटेनर स्कैनिंग का विस्तार प्रवर्तन को मजबूत करेगा। जीएसटी सरलीकरण से अनुपालन बढ़ेगा।
चालू वित्तीय वर्ष की पहली तीन तिमाहियों में 500 किलो सोना, 150 मिलियन सिगरेट स्टिक, 20 मीट्रिक टन लाल चंदन, 120 किलो कोकीन जब्त हुए। हवाई अड्डों पर 50 किलो हेरोइन, 350 किलो एम्फेटामाइन और 3700 किलो हाइड्रोपोनिक कैनबिस भी पकड़े गए।
अनिल राजपूत का प्रस्ताव तस्करी के खिलाफ वैश्विक युद्ध का प्रतीक बन सकता है। भारत की अगुवाई में दुनिया एकजुट होकर इस समस्या का समाधान ढूंढे।