
सुप्रीम कोर्ट ने एयर इंडिया फ्लाइट एआई-171 के भयानक क्रैश की जांच को केंद्र सरकार को तीन सप्ताह का अतिरिक्त समय दे दिया है। जस्टिस सूर्यकांत की बेंच ने सुनवाई के दौरान इस अनुरोध को स्वीकार करते हुए रिपोर्ट को सील बंद लिफाफे में पेश करने का आदेश दिया। अगली सुनवाई इसी अवधि के बाद निर्धारित की गई है।
यह हादसा 12 जून 2025 को अहमदाबाद में हुआ, जब लंदन जाने वाली बोइंग 787-8 ड्रीमलाइनर टेकऑफ के 32 सेकंड बाद ही मेडिकल कॉलेज के हॉस्टल में जा घुसी। कैप्टन सुमित सभरवाल सहित 241 यात्री-क्रू और जमीन पर 19 लोग—कुल 260 जिंदगियां खत्म हो गईं। प्रारंभिक जांच में दोनों इंजनों को फ्यूल सप्लाई बंद होने का खुलासा हुआ।
मृतक पायलट के 91 वर्षीय पिता पुष्कर राज सभरवाल ने न्यायिक निगरानी में स्वतंत्र जांच की मांग करते हुए याचिका दायर की। इंडियन पायलट्स फेडरेशन ने भी यही अपील की। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बताया कि जांच अंतिम पड़ाव पर है, लेकिन कुछ पार्ट्स की विदेशी लैब जांच बाकी है।
याचिकाकर्ताओं के वकील प्रशांत भूषण ने बोइंग 787 में तीन अन्य फ्यूल स्विच खराबी के उदाहरण दिए। 8,000 पायलटों का मानना है कि यह विमान असुरक्षित है, इसे उड़ान से हटाया जाए। हालिया लंदन-दिल्ली फ्लाइट में समान समस्या पर एयर इंडिया ने एक प्लेन ग्राउंड किया, लेकिन डीजीसीए ने दोषमुक्त पाया।
एडवोकेट गोपाल शंकर नारायण ने बोइंग 737 मैक्स हादसों का जिक्र किया, जहां पायलटों को पहले जिम्मेदार ठहराया गया, बाद में डिजाइन दोष सामने आए। जस्टिस सूर्यकांत ने हालिया घटना का उल्लेख कर चेताया कि एयरलाइन पर टिप्पणी सावधानी से हो।
परिवारों को न्याय की प्रतीक्षा में यह समय जांच एजेंसियों के लिए महत्वपूर्ण है। रिपोर्ट से फ्यूल सिस्टम या अन्य कमियों का पता चल सकता है, जो विमानन सुरक्षा को नई दिशा देगी।