
शिमला में राजनीतिक तापमान चढ़ गया जब पूर्व मुख्यमंत्री और विपक्ष के नेता जयराम ठाकुर ने वर्तमान मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू पर सीधी चोट की। केंद्र के हालिया बजट में राजस्व घाटा अनुदान (रेवेन्यू डेफिसिट ग्रांट) बंद होने को लेकर सुक्खू के बयानों को झूठा बताते हुए ठाकुर ने कहा कि यह नीति पूरे देश के सभी राज्यों पर लागू है, सिर्फ हिमाचल पर नहीं।
ठाकुर ने स्पष्ट किया कि वित्त आयोग की सिफारिशों के अनुरूप यह फैसला लिया गया है। बजट राष्ट्रीय स्तर का है, किसी एक राज्य के लिए नहीं। सुक्खू का हिमाचल के साथ अन्याय का रोना गुमराह करने वाला है। उन्होंने बताया कि 14वें वित्त आयोग में उनकी सरकार ने 40,000 करोड़ रुपये की राशि दिलाई, जबकि पहले सिर्फ 7,800 करोड़ मिले थे।
15वें वित्त आयोग में भी धीरे-धीरे कमी की गई, जो कोविड संकट से उपजी थी। हिमाचल ने देश में सबसे अधिक अनुदान प्राप्त किया क्योंकि पूर्व सरकार ने मजबूती से पक्ष रखा। कर्नाटक व तेलंगाना जैसी सरकारों ने ऐसा किया, लेकिन वर्तमान कांग्रेस सरकार नाकाम रही।
वित्त सचिव की चेतावनी का जिक्र करते हुए ठाकुर ने कहा कि बिजली-पानी-राशन सब्सिडी खत्म, नई भर्तियां बंद, विकास कार्य ठप और 7,000 करोड़ की कमी। फिर भी सुक्खू केंद्र व पूर्व सरकार पर दोष डाल रहे हैं।
अपने कार्यकाल में गृहिणी सुविधा, सहारा, हिमकेयर, स्वाभिमान, शगुन योजनाओं व जल जीवन मिशन से सड़कें, हर घर जल जैसी उपलब्धियां हासिल कीं। अब पेंशनभोगी, कर्मचारी व ग्रामीण चिंतित हैं। ठाकुर ने अपील की- तथ्य सामने लाएं, झूठ न बोलें। हिमाचल आत्मनिर्भर बनाने का खाका कब?
सब्सिडी कटौती व आर्थिक संकट में जनता सच जानना चाहती है। बहुमत होने पर भी मंत्रियों के असंतोष से सरकार लड़खड़ा रही है। जनहित में पारदर्शिता जरूरी है।