
नई दिल्ली। सरकार के एआई जनित डीपफेक कंटेंट के खिलाफ नए नियमों का कानूनी हलकों में जोरदार स्वागत हो रहा है। सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के लिए स्पष्ट और व्यावहारिक दिशा-निर्देश जारी किए हैं, जो भ्रामक सामग्री पर केंद्रित हैं।
पहले हर एआई कंटेंट पर बड़ा लेबल चस्पा करने का प्रस्ताव था, लेकिन अब फोकस केवल गुमराह करने वाले कंटेंट पर है। फेसबुक, इंस्टाग्राम और यूट्यूब जैसे प्लेटफॉर्म्स को एआई सामग्री में दिखाई देने वाले चिन्ह या मेटाडेटा जोड़ना अनिवार्य होगा।
आईटी नियम 2021 के संशोधन से सरकार डीपफेक पर निगरानी रख सकेगी और आवश्यकता पर कार्रवाई कर सकेगी। इसका मकसद यूजर्स को सच्चाई और नकली कंटेंट में फर्क समझाना है।
जेएसए एडवोकेट्स के सजाई सिंह ने कहा, ‘ये नियम पुराने ड्राफ्ट से बेहतर हैं। भ्रामक कंटेंट पर जोर देकर प्लेटफॉर्म्स को राहत मिलेगी।’
अब सरकारी आदेश पर डीपफेक 3 घंटे में हटाने होंगे, पहले 36 घंटे थे। लेबल हटाने या छिपाने पर पाबंदी है। प्लेटफॉर्म्स को अवैध एआई कंटेंट ढूंढने वाले टूल्स भी अपनाने होंगे।
ये कदम डिजिटल दुनिया में भरोसे को मजबूत करेंगे, खासकर चुनावों और सामाजिक मुद्दों पर। भारत डीपफेक के खिलाफ मजबूत नीति बना रहा है।