
ढाका में 12 फरवरी को होने वाले आम चुनावों से ठीक पहले निर्वासित पूर्व राजदूत मोहम्मद हारून अल राशिद ने भारी आरोप लगाए हैं। उन्होंने श्रीलंका के थिंक टैंक ट्रिंको सेंटर को दिए साक्षात्कार में कहा कि यह बांग्लादेश के इतिहास का सबसे बदसूरत चुनाव साबित होगा।
अंतरिम सरकार के प्रमुख सलाहकार मुहम्मद यूनुस पर निशाना साधते हुए राशिद ने कहा कि यूनुस लंबे समय से खराब चीजों को सुंदर बनाकर खुद को बचाते रहे हैं। ‘वे सब कुछ खूबसूरत बताते हैं, लेकिन यह चुनाव देश का सबसे कुरूप चेहरा दिखाएगा। इस बार जवाबदेही से बचना मुश्किल होगा।’
राशिद ने इसे वास्तविक चुनाव नहीं बल्कि 2024 के जिहादी गठबंधन के दो धड़ों के बीच संघर्ष बताया, जिसने शेख हसीना को सत्ता से हटाया। एक ओर बीएनपी और सहयोगी, जो वैचारिक रूप से मुस्लिम ब्रदरहुड जैसे हैं, दूसरी ओर जमात-ए-इस्लामी जो हमास की तरह कट्टर है।
‘दोनों लोकतांत्रिक मूल्यों का समर्थन नहीं करते। असली लोकतांत्रिक दलों को चुनाव लड़ने नहीं दिया गया। यूनुस जमात और एनसीपी जैसे सहयोगियों के पक्ष में नतीजे प्रभावित कर रहे हैं, जिनके कार्यकर्ताओं ने कोटा आंदोलन के नाम पर हिंसा भड़काई थी।’
बांग्लादेश के धर्मनिरपेक्ष गणराज्य से आतंक प्रभावित देश बनने पर राशिद ने इसे 21वीं सदी की मानवता के लिए झटका बताया। यूनुस के 18 महीने के शासन ने हसीना युग की आर्थिक प्रगति, धर्मनिरपेक्ष पहचान और मुक्ति संग्राम की विरासत को नष्ट कर दिया।
‘यह राजनीतिक पतन नहीं, सभ्यता के विरुद्ध बर्बरता है।’ पश्चिम में उदारवादी छवि वाले यूनुस को राशिद ने ‘मक्कार और वैश्विक धोखेबाज’ कहा, जो अपनी चालाकी से पश्चिम को भ्रमित करते रहे।
चुनाव के परिणाम देश के भविष्य को तय करेंगे, लेकिन राशिद के बयान ने इसकी विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।