
दुनिया में क्षेत्रीय संघर्षों, ऊंचे टैरिफ और कमजोर अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के दौर में भारत और यूरोपीय संघ के बीच मुक्त व्यापार समझौता एक नई उम्मीद जगाता है। इसे ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ करार दिया गया है, जो वैश्विक व्यापार की नई दिशा तय कर रहा है।
यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन, परिषद अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा और पीएम नरेंद्र मोदी द्वारा घोषित यह समझौता 2 अरब उपभोक्ताओं और वैश्विक जीडीपी के एक-चौथाई हिस्से को जोड़ने का वादा करता है।
कोपेनहेगन विश्वविद्यालय की प्रोफेसर रविंदर कौर के अनुसार, यह साझेदारी अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं को मजबूत करने, सुरक्षा, शोध, लोगों की गतिशीलता और कनेक्टिविटी में सहयोग बढ़ाने का संकेत देती है, जिसमें हिंद-प्रशांत क्षेत्र की अहम भूमिका है।
अमेरिका के क्षेत्रीय मोड़ के साथ हिंद-प्रशांत ईयू के लिए खुल रहा है। कौर कहती हैं कि ‘अमेरिका के बाद की दुनिया’ बन रही है और यह डील इसका प्रतीक है।
ब्रसेल्स ने मर्कोसुर के साथ भी डील की है, जबकि भारत ने ब्रिटेन व न्यूजीलैंड से समझौते किए। इनसे बहुध्रुवीय दुनिया, रणनीतिक स्वायत्तता और डॉलर निर्भरता घटाने की दिशा में तेजी आ रही है।
न्यूयॉर्क की एशिया सोसाइटी की फरवा आमेर का मानना है कि ईयू डील ने अमेरिका को भारत के साथ व्यापार वार्ता तेज करने को प्रेरित किया। इसका समय महत्वपूर्ण है।