
नई दिल्ली। भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित व्यापार सौदे से भारतीय निर्यात पर प्रभावी टैरिफ दर 12-13 प्रतिशत तक कम रहने का अनुमान है। बैंक ऑफ अमेरिका ग्लोबल रिसर्च की ताजा रिपोर्ट में यह खुलासा किया गया है, बशर्ते पारस्परिक टैरिफ 18 प्रतिशत पर टिका रहे।
रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका जाने वाले भारतीय निर्यात में इलेक्ट्रॉनिक्स की हिस्सेदारी 40-45 प्रतिशत है, जो शून्य टैरिफ का लाभ उठा रहा है। धारा 232 के अतिरिक्त शुल्क जोड़ने पर भी प्रभावी दर 12 प्रतिशत से थोड़ी अधिक ही रहेगी। इससे निर्यातकों को मजबूत प्रतिस्पर्धी बढ़त मिलेगी।
हालांकि, धारा 232 के तहत ऑटोमोबाइल, पार्ट्स, लोहा-स्टील और एल्यूमीनियम पर 25 प्रतिशत टैरिफ बरकरार रह सकते हैं, क्योंकि पहले चरण में इस पर स्पष्टता नहीं है। इन क्षेत्रों के निर्यातकों को सतर्क रहना होगा।
श्रम प्रधान क्षेत्र जैसे टेक्सटाइल और रत्न-आभूषण को विशेष लाभ होगा। भारत का अमेरिका से 500 अरब डॉलर का आयात लक्ष्य पांच वर्षों में 100 अरब डॉलर सालाना के बराबर है, जो 750 अरब डॉलर के कुल आयात में अमेरिकी हिस्सेदारी मात्र 6 प्रतिशत होने से आसानी से हासिल हो सकता है।
रूस की जगह अमेरिका से ऊर्जा खरीदने से चालू खाते पर असर नगण्य रहेगा। सेवाओं के निर्यात में वृद्धि से दिसंबर 2025 तक अधिशेष की स्थिति बन सकती है। यह सौदा दोनों देशों के आर्थिक संबंधों को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा।