
गाजियाबाद। भारत और अमेरिका के बीच हालिया व्यापारिक समझौता भारतीय प्लास्टिक उद्योग के लिए बड़ा अवसर लेकर आया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे अमेरिकी बाजार में देश की हिस्सेदारी तेजी से बढ़ेगी।
आरएमजी पॉलिमर के प्रबंध निदेशक अरविंद गोयनका ने बताया कि अमेरिका प्रतिवर्ष लगभग 75 अरब डॉलर का प्लास्टिक आयात करता है, जबकि भारत का वर्तमान निर्यात मात्र 2.2 अरब डॉलर का है। इस समझौते से निर्यात दोगुना होने की पूरी संभावना है।
उन्होंने पीवीसी उत्पादों पर जोर देते हुए कहा कि अमेरिका इसकी बड़ी खरीदारी करता है। भारतीय कंपनियां यदि अधिक आपूर्ति करेंगी तो ये उत्पाद अन्य देशों में भी निर्यात होंगे, जिससे वैश्विक स्तर पर पहचान बनेगी।
अमेरिका की 30 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था और 34 करोड़ आबादी उच्च गुणवत्ता वाले सामान मांगती है। इससे भारत में उत्पादन स्तर ऊंचा होगा और आम उपभोक्ताओं को भी फायदा पहुंचेगा।
गोयनका ने कहा कि अमेरिकी बाजार में स्वीकृति मिलने से खाड़ी, यूरोप व रूस जैसे क्षेत्रों में स्वीकार्यता बढ़ जाती है। इस तरह व्यापार वृद्धि बहुआयामी लाभ देगी।
यह समझौता प्लास्टिक क्षेत्र को मजबूत बनाने के साथ भारत को विश्वसनीय आपूर्तिकर्ता के रूप में स्थापित करेगा।