
नई दिल्ली में विश्व स्तरीय आयोजन की तैयारी जोरों पर है। भारत द्वारा आयोजित इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 कृत्रिम बुद्धिमत्ता के लोकतंत्रीकरण पर केंद्रित होगा। इसका उद्देश्य समावेशी विकास को गति देना और नवाचार को प्रोत्साहित करना है, ताकि एआई के फायदे समाज के हर वर्ग तक पहुंच सकें।
मंगलवार को जारी आधिकारिक बयान में बताया गया कि किफायतीपन, पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर बल देकर किसानों, विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं, स्टार्टअप्स और सरकारी संस्थानों को समान अवसर प्रदान किए जाएंगे। सरकार का मानना है कि एआई लोकतंत्रीकरण एक सतत प्रक्रिया है, जो समाज को सशक्त बनाएगी, असमानताओं को दूर करेगी और सभी के लिए स्थायी प्रगति सुनिश्चित करेगी।
वैश्विक दक्षिण के देशों के लिए एआई का वास्तविक लोकतंत्रीकरण डेटा, कम्प्यूटिंग शक्ति और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर तक निष्पक्ष पहुंच पर टिका है। यह समिट सामूहिक सहयोग का मंच बनेगी, जिसमें 15-20 राष्ट्राध्यक्ष, 50 से अधिक अंतरराष्ट्रीय संगठन और 100 से ज्यादा वैश्विक व भारतीय सीएक्सओ शामिल होंगे।
सात परस्पर जुड़े विषयों पर चर्चाएं चक्रों और कार्य समूहों के जरिए होंगी। खास तौर पर एआई संसाधनों के लोकतंत्रीकरण पर कार्य समूह महत्वपूर्ण है, जिसकी सह-अध्यक्षता भारत, मिस्र और केन्या कर रहे हैं। यह समूह साझा पहुंच, सहयोग और क्षमता विकास के माध्यम से वैश्विक एआई पारिस्थितिकी को समावेशी बनाने पर काम करेगा।
16 से 20 फरवरी तक भारत मंडपम में होने वाला यह समिट वैश्विक दक्षिण का पहला वैश्विक एआई आयोजन होगा। यह वैश्विक नेताें, नीति विशेषज्ञों, प्रौद्योगिकी कंपनियों और नवोन्मेषकों को एक मंच पर लाकर एआई की समावेशी विकास, शासन और सततता में भूमिका पर विचार-विमर्श करेगा।