
भारत में सोना न केवल आभूषणों का प्रतीक है, बल्कि यह एक मजबूत निवेश का माध्यम भी है। शादियों, त्योहारों और भविष्य की सुरक्षा के लिए लाखों लोग सोने में पैसा लगाते हैं। लेकिन इसकी खरीद-बिक्री में टैक्स के नियमों को नजरअंदाज करने से मुनाफा पानी जा सकता है। आइए समझते हैं इन नियमों को विस्तार से, ताकि आप सही निर्णय ले सकें।
सोना खरीदते ही 3 प्रतिशत जीएसटी लगता है, चाहे वह सिक्का हो, बार हो या डिजिटल गोल्ड। ज्वेलरी पर मेकिंग चार्ज के लिए अतिरिक्त 5 प्रतिशत जीएसटी देना पड़ता है। इससे कुल खरीद मूल्य बढ़ जाता है, जो बिक्री के समय लाभ को प्रभावित करता है।
बिक्री पर कैपिटल गेन्स टैक्स लागू होता है, जो लाभ पर आधारित है। तीन साल से कम समय में बेचने पर शॉर्ट टर्म गेन आपकी आय में जुड़कर स्लैब रेट से टैक्स होता है। अधिकतम 30 प्रतिशत तक यह जा सकता है।
तीन साल से ज्यादा होल्डिंग पर लॉन्ग टर्म गेन पर 20 प्रतिशत टैक्स, लेकिन इंडेक्सेशन लाभ मिलता है। महंगाई के हिसाब से खरीद मूल्य बढ़ाया जाता है, जिससे कर योग्य लाभ घट जाता है। लंबे निवेश के लिए यह बेहतरीन है।
विरासत का सोना टैक्स मुक्त मिलता है, मगर बेचने पर मूल मालिक की खरीद तिथि से होल्डिंग गिनी जाती है। घर में सोने की सीमा—विवाहित महिला 500 ग्राम, अविवाहित 250 ग्राम, पुरुष 100 ग्राम। इससे ज्यादा पर स्रोत साबित करना जरूरी।
डिजिटल गोल्ड पर भी यही नियम। कुल मिलाकर, टैक्स जागरूकता से सोने का निवेश सुरक्षित और लाभकारी बनता है। नियमों का पालन करें, नुकसान न झेलें।