
15 फरवरी को महाशिवरात्रि का पावन पर्व पूरे देश में धूमधाम से मनाया जाएगा। इसी उत्साह के बीच उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले के रुद्रपुर में स्थित दुग्धेश्वर महादेव मंदिर भक्तों का केंद्र बन रहा है। हजारों वर्ष पुराना यह मंदिर गाय के दूध से उत्पन्न हुआ और इसका शिवलिंग पाताल लोक तक फैला माना जाता है। स्पर्श मात्र से कष्ट नाश होने की मान्यता है।
18 एकड़ में फैले इस मंदिर का गर्भगृह 15 फीट नीचे है, जहां सीढ़ियों से उतरना पड़ता है। यही कारण है कि बाबा को पाताल का राजा कहा जाता है। शिवलिंग का अनोखा खंडित पाषाण स्वरूप चंडलिंग अवतार है, जो उज्जैन के महाकाल का उपरूप माना जाता है। दर्शन से ज्योतिर्लिंग के समान फल मिलता है।
पौराणिक कथा रोचक है। एक गोपालक की गाय रोज यहां दूध गिराती थी। पीछा करने पर स्वयंभू शिवलिंग प्रकट हुआ। तब से दूध अर्पण की परंपरा चली आ रही है। महाशिवरात्रि पर विशेष श्रृंगार और मेला लगता है। सावन में भी भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है। राजनीतिक महत्व के कारण भी यह प्रसिद्ध है। इस महाशिवरात्रि बाबा के चरणों में पहुंचें।