
काठमांडू। नेपाल की नेशनल असेंबली ने सोशल मीडिया के उपयोग और प्रबंधन पर प्रस्तावित बिल को एकमत से वापस लेने का फैसला किया है। यह कदम ऑस्ट्रेलिया के नाबालिगों पर सोशल मीडिया प्रतिबंध के बीच आया है, जो विश्व स्तर पर बच्चों की डिजिटल सुरक्षा पर बहस को तेज कर रहा है।
असेंबली चेयरमैन नारायण दहाल ने बिल वापसी का प्रस्ताव पेश किया, जो सर्वसम्मति से पारित हो गया। इससे पहले लेजिस्लेशन मैनेजमेंट कमेटी की अध्यक्ष तुलसा कुमारी दहल ने रिपोर्ट प्रस्तुत की थी, जिसमें 35 सदस्यों ने 155 संशोधन सुझाए थे। संचार मंत्रालय ने 3 फरवरी को ही बिल वापसी का निर्णय लिया था।
2025 में नेपाल में सोशल मीडिया बैन के प्रस्ताव ने जेन-जी आंदोलन को जन्म दिया था, जो युवाओं का जोरदार विरोध था। ऑस्ट्रेलिया ने 16 साल से कम उम्र वालों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया, जिसके बाद प्लेटफॉर्म्स ने 47 लाख नाबालिग अकाउंट हटा दिए। ई-सेफ्टी कमिश्नर जूली इनमैन ग्रांट ने इसे सकारात्मक बताया।
डेनमार्क, आयरलैंड और नॉर्डिक देश 15 साल से कम उम्र पर प्रतिबंध की योजना बना रहे हैं। नेपाल का यह फैसला संतुलित नीतियों की दिशा में कदम है, जहां सुरक्षा और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता दोनों संभव हों। युवा सक्रियता ने एक बार फिर साबित किया कि जल्दबाजी भरा कानून कितना खतरनाक हो सकता है।