
देश में डायबिटीज और थायरॉइड के बाद फेफड़ों का कैंसर तेज रफ्तार से बढ़ रहा है। आयुष मंत्रालय ने लोगों को सतर्क करते हुए बताया कि मामूली खांसी भी इस घातक बीमारी का शुरुआती लक्षण हो सकती है।
आईसीएमआर की रिपोर्ट के अनुसार 2025 तक 81,219 पुरुषों और 30,109 महिलाओं में नए मामले सामने आ सकते हैं। मंत्रालय ने सोशल मीडिया के जरिए जागरूकता अभियान चलाया है, जिसमें लक्षणों की विस्तृत जानकारी दी गई है।
लगातार खांसी, थकान, सांस फूलना, सीने में दर्द और बिना कारण वजन घटना जैसे संकेतों को नजरअंदाज न करें। ये सामान्य सर्दी-जुकाम जैसे लगते हैं, लेकिन समय पर जांच न हो तो हालात बिगड़ सकते हैं।
कैंसर के कारणों में धूम्रपान के अलावा सेकेंड हैंड स्मोक, प्रदूषित हवा और एस्बेस्टस जैसे रसायन शामिल हैं। जल्दी डॉक्टर से संपर्क करने से इलाज संभव है।
फेफड़ों की कोशिकाओं में अनियंत्रित वृद्धि से ट्यूमर बनता है। भारत में नॉन-स्मॉल सेल प्रकार अधिक है, जो शुरुआती चरण में ठीक हो सकता है, जबकि स्मॉल सेल तेजी से फैलता है।
धूम्रपान छोड़ें, प्रदूषण से बचें और नियमित जांच कराएं। आयुष का यह संदेश जीवन रक्षा का माध्यम बनेगा।