
प्रयागराज। संभल हिंसा मामले ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में नया मोड़ ले लिया है। मंगलवार को कोर्ट में सभी पक्ष अपनी दलीलें रखेंगे। सोमवार को उत्तर प्रदेश सरकार और संभल के एएसपी अनुज चौधरी की याचिकाओं पर सुनवाई हुई, जिसमें तत्कालीन मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के एफआईआर आदेश को चुनौती दी गई है।
न्यायमूर्ति सुमीत गोपाल की अदालत में एएसपी चौधरी और अन्य अधिकारियों पर दर्ज एफआईआर को रद्द करने की मांग उठी। मामला नवंबर 2024 की संभल हिंसा से जुड़ा है, जहां घायल युवक यामीन ने पुलिस पर गोली मारने का आरोप लगाया।
अपर महाधिवक्ता मनीष गोयल ने बीएनएसएस की धारा 175(4) का हवाला देते हुए कहा कि मजिस्ट्रेट ने लोक सेवकों को संरक्षण देने वाली अनिवार्य प्रक्रिया की अनदेखी की। उन्होंने बताया कि शिकायत में थाने में पूर्व शिकायत का जिक्र तक नहीं, जो कानूनी शर्त है।
राज्य की ओर से यह भी कहा गया कि सीजेएम ने पुलिस रिपोर्ट को नजरअंदाज किया, जिसमें घटना पर पहले से मुकदमा चल रहा है। संभल हिंसा को एकल घटना न बताते हुए अव्यवस्था का परिणाम बताया गया।
यह सुनवाई पुलिस अधिकारियों की सुरक्षा और न्यायिक विवेक के बीच संतुलन पर रोशनी डालती है। फैसला भविष्य के मामलों के लिए मिसाल कायम कर सकता है। आगामी सुनवाई में नई जानकारियां सामने आ सकती हैं।