
कभी गौर किया है कि रेस्टोरेंट या स्ट्रीट फूड खाने के बाद प्यास इतनी क्यों सताती है, जबकि घर का पराठा-सब्जी खाकर ऐसा नहीं होता? दिल्ली जैसे महानगरों में यह आम समस्या है। आइए जानें इसके पीछे का विज्ञान और बचाव के उपाय।
सबसे बड़ा दोषी है सोडियम। बाहर के व्यंजनों में स्वाद बढ़ाने को नमक की भरमार होती है—प्रोसेस्ड आटे, मसाले और प्रिजर्वेटिव्स से। इससे शरीर का तरल पदार्थ संतुलन बिगड़ जाता है। कोशिकाएं मस्तिष्क को संदेश भेजती हैं: पानी चाहिए! किडनी अतिरिक्त नमक बाहर निकालने को पानी जमा करने लगती है।
दूसरा कारण भारी तेल-मसाला। तले-भुने पकवान पचाने में पेट को अतिरिक्त जल चाहिए। प्रोटीन वाले व्यंजन तो और मेहनत मांगते हैं। घर पर पूड़ी खाओ तो भी यही होता है—पेट भारी, प्यास बनी रहती।
लंबे समय में उच्च सोडियम ब्लड प्रेशर, किडनी पर बोझ। घर का खाना औषधि सरीखा।
समाधान: सादा पानी न लें, छाछ पिएं—पाचन सुधारती, प्यास बुझाती। आदत डालें: कम नमक, घरेलू भोजन। स्वस्थ रहें, प्यास से दूर रहें।