
बॉलीवुड के सुनहरे दौर में अगर अनोखी कहानियों और अलग अंदाज की फिल्मों की बात हो, तो केसी बोकाडिया का नाम सबसे ऊपर चमकता है। राजस्थान के नागौर जिले के मेड़ता सिटी में 10 फरवरी को जन्मे किश्तूर चंद बोकाडिया ने अपने करियर में 60 से अधिक फिल्में बनाईं और निर्देशित कीं। उनकी फिल्में आज भी दर्शकों को बांधे रखती हैं, चाहे वे सालों पुरानी ही क्यों न हों।
उनकी निर्मित फिल्मों में ‘प्यार झुकता नहीं’, ‘तेरी मेहरबानियां’, ‘नसीब अपना अपना’, ‘हम तुम्हारे हैं सनम’, ‘प्यार जिंदगी है’ और ‘मैं तेरा दुश्मन’ जैसी रोमांटिक और पारिवारिक ड्रामे शामिल हैं, जिन्होंने उस समय तहलका मचा दिया था। निर्देशन के क्षेत्र में ‘फूल बने अंगारे’, ‘पुलिस और मुजरिम’, ‘इंसानियत के देवता’, ‘कुदरत का कानून’ और विशेष रूप से ‘आज का अर्जुन’ उनकी प्रमुख कृतियां रहीं। ‘पाप का अंत’ को उन्होंने सह-निर्माता के रूप में पेश किया।
बोकाडिया ने बॉलीवुड के लगभग हर बड़े सितारे को अपनी फिल्मों में स्थान दिया। राजेश खन्ना से लेकर जीतेंद्र, अमिताभ बच्चन, शत्रुघ्न सिन्हा, धर्मेंद्र, रजनीकांत, मिथुन चक्रवर्ती, विनोद खन्ना, गोविंदा, जैकी श्रॉफ, अनिल कपूर, सलमान खान, शाहरुख खान, अजय देवगन, अक्षय कुमार और सनी देओल तक – सभी ने उनके प्रोजेक्ट्स में जादू बिखेरा। कई कलाकारों को उन्होंने करियर की नई उड़ान दी।
अमिताभ बच्चन के साथ उनका रिश्ता खासा मशहूर है। 1980 के अंत और 1990 की शुरुआत में बोफोर्स कांड के कारण जब बच्चन पर झूठे इल्जाम लगे और कई लोग दूर हो गए, तब बोकाडिया ने उनका साथ नहीं छोड़ा। ‘आज का अर्जुन’ उसी दौर की देन थी, जिसमें जया प्रदा भी मुख्य भूमिका में थीं। बाद में बच्चन ने बताया कि कोर्ट में जीत के बाद सबसे पहले बोकाडिया ही मिलने आए।
उनकी फिल्में परिवार, प्रेम, इंसानियत और न्याय के इर्द-गिर्द घूमती रहीं। आम जन की कहानियों को अनोखे कॉन्सेप्ट से सजाकर उन्होंने दर्शकों का दिल जीत लिया। उनका आखिरी निर्देशन 2019 की तमिल फिल्म ‘रॉकी: द रिवेंज’ था, जिसमें श्रीकांत और नासिर जैसे सितारे थे। बोकाडिया की फिल्में साबित करती हैं कि सच्ची कहानी कभी पुरानी नहीं होती।