
लंदन। ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर अपने विवादास्पद फैसले के कारण विपक्ष के तीखे हमलों का शिकार हो रहे हैं, लेकिन उनका दावा है कि वे पद पर बने रहेंगे। पीटर मैंडेलसन को अमेरिकी राजदूत बनाने के फैसले ने एपस्टीन स्कैंडल को फिर से सुर्खियों में ला दिया है।
स्टार्मर के प्रवक्ता ने स्पष्ट कहा कि प्रधानमंत्री ‘देशभर में बदलाव लाने के काम में जुटे हुए हैं।’ यह बयान उनके चीफ ऑफ स्टाफ और कम्युनिकेशन चीफ के इस्तीफे के ठीक बाद आया, जिसने लेबर सरकार में हड़कंप मचा दिया।
मैंडेलसन का 2008 में दोषी ठहराए गए जेफ्री एपस्टीन से संबंध होने के बावजूद स्टार्मर ने उन्हें राजदूत नियुक्त किया था। 19 महीने पुरानी उनकी सरकार अब इस गलती की कीमत चुक रही है। विपक्ष नेता इस्तीफे की मांग कर रहे हैं।
बीबीसी के मुताबिक, स्टार्मर स्टाफ को संबोधित करने के बाद ‘खुश और आत्मविश्वासी’ नजर आए। प्रवक्ता ने वीकेंड में पद छोड़ने की अफवाहों को सिरे से खारिज किया। उन्होंने कहा कि स्टार्मर कैबिनेट का पूर्ण समर्थन प्राप्त कर रहे हैं।
रविवार को चीफ ऑफ स्टाफ मॉर्गन मैकस्वीनी ने इस्तीफा दे दिया। 2024 चुनाव जीत के सूत्रधार मैकस्वीनी ने मैंडेलसन नियुक्ति को ‘गलत’ बताते हुए जिम्मेदारी ली और कहा कि इससे पार्टी, देश व राजनीति को गहरा नुकसान हुआ।
विदेश मंत्रालय ने मैंडेलसन के निकास भुगतान की जांच शुरू कर दी है। सितंबर में स्टार्मर ने खुद एपस्टीन संबंधों के कारण उन्हें पद से हटा दिया था। स्टार्मर का भविष्य अब इस संकट पर निर्भर करता है।