
10 फरवरी 2005 का दिन विश्व इतिहास में स्वर्ण अक्षरों से लिखा जाएगा। उत्तर कोरिया ने अपनी सरकारी समाचार एजेंसी के जरिए आधिकारिक तौर पर घोषणा की कि उसके पास परमाणु हथियार हैं। इस छोटे से देश की यह हिम्मत ने महाशक्तियों को भी सोचने पर मजबूर कर दिया।
यह बयान उस समय आया जब अमेरिका, चीन, जापान, दक्षिण कोरिया, रूस और उत्तर कोरिया के बीच छह पक्षीय वार्ताएं चल रही थीं। इनका मकसद कोरियाई प्रायद्वीप को निश्शस्त्रीकरण था, लेकिन प्योंगयांग ने साफ कर दिया कि वह अब सिर्फ कार्यक्रम नहीं चला रहा, बल्कि परमाणु शक्ति बन चुका है। एनपीटी पर यह करारा प्रहार था।
अमेरिका ने इसे शांति के लिए खतरा बताया, जबकि जापान व दक्षिण कोरिया में मिसाइल भय से हड़कंप मच गया। चीन ने संयम बरतने को कहा, क्योंकि क्षेत्रीय अस्थिरता उसकी अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचा सकती थी। रूस ने प्रसार रोकने पर जोर दिया।
किम जोंग-इल के शासन ने परमाणु को राष्ट्रीय गौरव व सुरक्षा का प्रतीक बनाया, जिससे आंतरिक एकता मजबूत हुई।
इसके बाद उत्तर कोरिया ने कई परीक्षण किए, मिसाइलें विकसित कीं। आज भी यह घटना वैश्विक सुरक्षा की बहस का केंद्र बनी हुई है।