
जम्मू-कश्मीर विधानसभा में सोमवार को एक महत्वपूर्ण खुलासा हुआ। ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री ने विधायक मीर मोहम्मद फैयाज के सवाल के लिखित जवाब में स्पष्ट किया कि केंद्र शासित प्रदेश में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के लगभग 3,800 सहायक कर्मचारियों को स्थायी करने का कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है।
ये कर्मचारी पंचायत, ब्लॉक, जिला, संभाग और यूटी स्तर पर तैनात हैं। वे ग्रामीण रोजगार गारंटी को जमीनी स्तर तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाते हैं। हालांकि, इनकी नियुक्ति पूरी तरह अस्थायी और ठेके के आधार पर है, जो योजना की अवधि तक सीमित है।
सरकार ने बताया कि इन कर्मचारियों के मानदेय में समय-समय पर वृद्धि की गई है। नवीनतम संशोधन 30 जनवरी 2024 के सरकारी आदेश संख्या 49-आरटी एंड पीआर के तहत हुआ। अब ग्राम रोजगार सेवक (जीआरएस) और प्रशासनिक/लेखा सहायक को 10,209 रुपये, तकनीकी सहायक को 16,500 रुपये तथा एमआईएस ऑपरेटर को 13,200 रुपये मासिक मानदेय मिलेगा।
‘वर्तमान में मनरेगा कर्मचारियों को नियमित करने का कोई प्रस्ताव नहीं है,’ जवाब में कहा गया। राज्य रोजगार गारंटी परिषद (एसईजीसी) की भावी बैठकों में मानदेय वृद्धि पर विचार होगा। यह फैसला केंद्र प्रायोजित योजना की प्रकृति को दर्शाता है, लेकिन कर्मचारियों में असंतोष पैदा कर सकता है। ग्रामीण विकास के लिए इनकी भूमिका महत्वपूर्ण होने से नीति पर पुनर्विचार की मांग तेज हो सकती है।