
अहमदाबाद के शांतिग्राम में अदाणी इंटरनेशनल स्कूल ने 6 से 8 फरवरी तक आईआरआईएस नेशनल फेयर 2025-26 का भव्य आयोजन किया। इस तीन दिवसीय राष्ट्रीय कार्यक्रम (कोहोर्ट 2) में 12 राज्यों के 24 शहरों से 75 छात्र नवोन्मेषकों ने शिक्षकों, शोधकर्ताओं और मार्गदर्शकों के साथ विचारों का आदान-प्रदान किया।
यह आयोजन अहमदाबाद को स्कूली स्तर पर एसटीईएम अनुसंधान का प्रमुख केंद्र बना गया। समापन समारोह में गुजरात की शिक्षा मंत्री रिवाबा जडेजा ने प्रारंभिक शिक्षा में अनुसंधान की महत्ता बताई। उन्होंने कहा कि अब शोध महंगी लैबों तक सीमित नहीं, बल्कि स्कूलों से शुरू होता है। बच्चे जब बचपन में ही सवाल उठाएं, प्रयोग करें और असफलताओं से सीखें, तो वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित होता है।
स्कूलों को केवल पढ़ाई के केंद्र नहीं, बल्कि नवाचार के उद्गाम स्थल बनना चाहिए। अदाणी इंटरनेशनल स्कूल की प्रेरक नम्रता अदाणी ने कहा कि जिज्ञासा को बचपन से पोषित करना जरूरी है। आईआरआईएस जैसे मंच छात्रों को वास्तविक चुनौतियों पर काम करने का मौका देते हैं।
मेले में छात्रों की अनुसंधान प्रदर्शनियां, कार्यशालाएं, संगोष्ठियां और जन-सहभागिता शामिल रही। उद्घाटन प्रधानाचार्यों के सम्मेलन से हुआ, जहां पूछताछ-आधारित शिक्षण पर चर्चा हुई। छात्रों ने विशेषज्ञों के सान्निध्य में मौलिक प्रोजेक्ट्स पेश किए।
समापन में नम्रता अदाणी और अदाणी ग्रुप के सीईओ अमित सिंह ने संबोधित किया। यह फेयर स्कूलों की बदलती भूमिका को रेखांकित करता है, जो भारत के भावी वैज्ञानिकों की नींव रख रहा है। अदाणी स्कूल आधुनिक तकनीक और अनुभवात्मक शिक्षा से छात्रों को भविष्य के लिए तैयार कर रहा है।