
नई दिल्ली में राज्यसभा के सोमवार के सत्र में एम्स रायबरेली की बदहाली ने जोरदार बहस छेड़ दी। कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने सदन में इस मुद्दे को उठाते हुए कहा कि एक दशक से अधिक समय गुजर जाने के बावजूद यह संस्थान अपनी पूर्ण क्षमता से संचालित नहीं हो सका है। डॉक्टरों और स्टाफ की भारी कमी से मरीजों को उचित इलाज नहीं मिल पा रहा।
तिवारी ने आंकड़े पेश करते हुए बताया कि 960 बेड वाले इस एम्स में अब केवल 610 बेड कार्यरत हैं। 200 सीनियर रेजिडेंट पदों पर महज 37 डॉक्टर तैनात हैं, जबकि 33 प्रोफेसर पदों में से सिर्फ 7 भरे हैं। उन्होंने 2013 में यूपीए सरकार द्वारा रखी गई आधारशिला का जिक्र किया और सोनिया गांधी के योगदान को रेखांकित करते हुए वर्तमान सरकार पर राजनीतिक बदले की राजनीति का आरोप लगाया। नए बजट में इसे नजरअंदाज किया गया है, जो चिंताजनक है।
इधर, महाराष्ट्र की सांसद रजनी अशोकराव पाटिल ने मराठवाड़ा के बीड जिले में इस साल 250 से अधिक किसानों की आत्महत्या का दर्दनाक आंकड़ा सदन के सामने रखा। सूखा, बाढ़ और कर्ज के बोझ तले दबे किसानों की सुनवाई न होने का रोना रोते हुए उन्होंने एमएसपी की कानूनी गारंटी की मांग की। छोटे किसान ब्याज के जाल में फंसकर जान दे देते हैं, जबकि बड़े उद्योगपति कर्ज लेकर फरार हो जाते हैं।
ये मुद्दे स्वास्थ्य और कृषि क्षेत्र की गंभीर समस्याओं को उजागर करते हैं, जिनका समाधान तत्काल आवश्यक है। सरकार को इन पर गंभीरता से कदम उठाने चाहिए।