
सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ शराब घोटाले से जुड़े मामलों में चैतन्य बघेल को मिली जमानत को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई स्थगित कर दी है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने जनवरी में दो मामलों में जमानत प्रदान की थी, जिसके खिलाफ राज्य सरकार ने शीर्ष अदालत का रुख किया।
सोमवार को हुई संक्षिप्त सुनवाई में मुख्य न्यायाधीश ने मामले को दो सप्ताह के लिए टाल दिया। उन्होंने राज्य सरकार को इस दौरान कोई नया घटनाक्रम रिकॉर्ड पर लाने की छूट भी दी। यह फैसला घोटाले की जांच के बीच महत्वपूर्ण है।
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के अनुसार, 2019 से 2022 तक चले इस घोटाले से करीब 3,000 करोड़ रुपये की अवैध कमाई हुई। कांग्रेस शासनकाल में शराब नीतियों में मनमानी कर नौकरशाहों, नेताओं और कारोबारियों के सिंडिकेट ने राज्य को भारी नुकसान पहुंचाया। ईडी ने अपनी अंतिम शिकायत में 59 नए आरोपियों को शामिल किया, कुल संख्या 81 हो गई।
चैतन्य बघेल ने ईडी की गिरफ्तारी से बचने के लिए हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। कोर्ट ने उन्हें राहत दी, लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट इस पर फैसला लेगा।
राज्य की राजनीति में यह मामला गरमाता जा रहा है। भाजपा इसे भ्रष्टाचार का प्रतीक बता रही है, जबकि कांग्रेस इसे सियासी बदले की कार्रवाई करार दे रही। अगली सुनवाई में नए सबूत निर्णायक साबित हो सकते हैं।
यह स्थगन चैतन्य के लिए अस्थायी राहत है, लेकिन घोटाले की गहराई उजागर हो रही है। शराब कारोबार में सुधार की मांग तेज हो गई है।