
भारतीय शेयर बाजार में एक नया दौर शुरू हो गया है। घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई) ने पहली बार निफ्टी50 सूचकांक में विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) को पीछे छोड़ दिया है। मोतीलाल ओसवाल सिक्योरिटीज की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, दिसंबर 2025 तिमाही तक डीआईआई के पास 24.8 प्रतिशत हिस्सेदारी पहुंच गई, जो एफआईआई के 24.3 प्रतिशत से अधिक है। पिछले आठ तिमाहियों में एफआईआई की हिस्सेदारी सबसे कम स्तर पर आ गई, जबकि डीआईआई का निवेश तेज रफ्तार पकड़ चुका है। 2025 में 3.34 लाख करोड़ रुपये की एसआईपी राशि और पेंशन फंडों की बढ़ती भूमिका ने घरेलू निवेश को बल दिया। बाजार में उतार-चढ़ाव आने पर भी यह प्रवृत्ति बरकरार रहने की उम्मीद है।