
कुआलालंपुर। मलेशिया यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आईएनए के बुजुर्ग सिपाही जयराज राजा राव से मुलाकात ने इतिहास और वर्तमान को जोड़ दिया। इस भावुक साक्षात्कार में जयराज ने पीएम मोदी के नेतृत्व की खुलकर तारीफ की और नेताजी सुभाष चंद्र बोस की अमर विरासत को ताजा किया।
जयराज ने कहा, ‘मैं खुद को भाग्यशाली मानता हूं कि मुझे एक और महान प्रधानमंत्री से मिलने का सौभाग्य प्राप्त हुआ।’ उन्होंने ग्रामीण भारत में शौचालय, जल संयंत्र और आर्थिक मजबूती के लिए मोदी की सराहना की। सभी समुदायों के साथ समान व्यवहार, पाकिस्तान पर सख्ती और अमेरिका जैसे शोषक देशों से दूरी – ये गुण उन्हें जोशीला नेता बनाते हैं।
बचपन की यादें साझा करते हुए जयराज ने बताया कि 12-13 साल की उम्र में नेताजी ने उन्हें माला पहनाई थी। पीएम मोदी, जो नेताजी के प्रशंसक हैं, इस मुलाकात से उत्साहित हुए। जयराज ने अपनी भारतीय पहचान पर जोर दिया – ‘मैं मलेशियन भारतीय हूं, न कि भारतीय मलेशियन।’
नेताजी के तीन गुणों पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा – पहला, उनकी वाक्पटुता ने तमिल, मलयाली जैसी क्षेत्रीय पहचानों को एक ‘भारतीय’ में बदल दिया। दूसरा, अहिंसा के बजाय सशस्त्र क्रांति पर विश्वास। तीसरा, स्त्री-पुरुष समानता और झांसी रानी रेजिमेंट का गठन।
आईएनए के योगदान को भुलाए जाने पर दुख जताते हुए जयराज ने याद दिलाया कि 1943 में नेताजी ने सिंगापुर-मलाया में कैदियों और नागरिकों से फौज बनाई, आजाद हिंद सरकार गठित की और बर्मा से जम्मू की ओर कूच किया। दक्षिण-पूर्व एशिया के भारतीयों ने इसमें योगदान दिया, लेकिन उनकी कुर्बानी कम पहचानी जाती है।
यह मुलाकात आईएनए की विरासत को जीवंत करती है, जो आज के भारत की प्रगति से जुड़ती है।