
योग की प्राचीन कला में विपरीतकरणी मुद्रा एक अनमोल रत्न है, जो शरीर और मन दोनों को स्वस्थ रखने का सरल तरीका प्रदान करती है। दीवार से सटाकर पैर ऊपर उठाने वाली यह मुद्रा पाचन तंत्र को मजबूत बनाने से लेकर थायरॉयड को संतुलित करने तक कई फायदे देती है।
इस आसन में लेटकर पैरों को सीधा ऊपर करके गुरुत्वाकर्षण के विपरीत शरीर को रखा जाता है। इससे प्राण शक्ति ऊर्ध्वमुखी बहती है और विभिन्न अंगों तक पोषण पहुंचता है। पाचन के लिए यह वरदान साबित होती है। पेट के अंगों की आंतरिक मालिश से भोजन सही पचता है, कब्ज दूर होता है। लंबे समय तक बैठने या गड़बड़ खान-पान से परेशान लोगों को विशेष राहत मिलती है क्योंकि आंतों में खून का दौर तेज होता है।
मानसिक शांति के लिए भी बेजोड़। एकाग्रता बढ़ती है, तनाव घटता है, दिमाग सतर्क रहता है। त्वचा निखरती है, बाल मजबूत चमकदार बनते हैं क्योंकि चेहरे-मस्तिष्क में रक्त संचार सुधरता है। थायरॉयड पर असर गजब का—गर्दन क्षेत्र में ब्लड फ्लो बढ़ने से ग्रंथि सक्रिय होती है, हाइपोथायरॉयडिज्म में फायदा।
रोजाना अभ्यास से जीवन संतुलित होता है। शुरुआत 5-10 मिनट से करें, समय बढ़ाएं। गर्भवती, हाई बीपी या गंभीर रोगी चिकित्सक सलाह लें। विपरीतकरणी से स्वस्थ जीवन आसान।