
हिंदी सिनेमा की दुनिया में बोल्डनेस का पर्याय रहीं नादिरा। ‘श्री 420’ के मशहूर गाने ‘मुड़ मुड़ के न देख’ ने उन्हें हमेशा के लिए अमर बना दिया। उनकी पुण्यतिथि पर विशेष नजर डालते हैं इस साहसी अभिनेत्री के सफर पर, जो टॉमबॉय से स्टार बनीं।
5 दिसंबर 1932 को इजरायल में यहूदी परिवार में जन्मीं फरहत एजेकेल बचपन से ही लड़कों जैसी रंगीन। फुटबॉल, गिल्ली-डंडा उनके खेल थे। मुंबई आने पर परिवार की मुश्किलों ने उन्हें संघर्ष सिखाया।
1952 में महबूब खान की ‘आन’ के लिए नरगिस तैयार न हुईं तो फरहत की नजर पड़ी। नाम बदला ‘नादिरा’, दिलीप कुमार संग डेब्यू। राजकुमारी का दमदार रोल हिट साबित हुआ।
फिर आईं ‘नगमा’ (1953), ‘वारिस’, ‘डाक बाबू’ (1954), ‘रफ्तार’, ‘जलन’ (1955)। ‘श्री 420’ (1956) में माया बनीं, गाना सुपरहिट। ‘पाकीजा’ जैसी फिल्में भी कीं।
नेगेटिव रोल्स में महारत: ‘काला बाजार’, ‘जूली’, ‘सागर’ आदि। अशोक कुमार, शम्मी कपूर संग काम। बाद के दशकों में ‘चालबाज’, ‘दहशत’, ‘जोश’ जैसी फिल्में। टीवी पर ‘एक था रस्टी’।
निजी जीवन में दो असफल शादियां। 9 फरवरी 2006 को निधन। लेकिन उनका अंदाज आज भी जिंदा है।