
हैदराबाद के फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी में रविवार को लगी रहस्यमयी आग ने राजनीतिक हलचल मचा दी है। भारत राष्ट्र समिति के कार्यकारी अध्यक्ष के.टी. रामाराव ने इसे मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी की साजिश करार देते हुए स्वतंत्र न्यायिक जांच की मांग की है। नगरपालिका चुनाव प्रचार के दौरान हनमकोंडा में मीडिया से बातचीत में केटीआर ने कहा कि यह ‘वोट-फॉर-नोट’ मामले के महत्वपूर्ण सबूत नष्ट करने की चाल है, जो अंतिम चरण में पहुंच चुका था।
घटना के कई संदिग्ध पहलू उजागर हो रहे हैं। सर्दियों में अत्यधिक सुरक्षित भवन में आग लगना, 24×7 चलने वाली लैब में कर्मचारियों की गैरमौजूदगी और सरकारी बयानों में विरोधाभास। शुरू में मामूली नुकसान बताया गया, लेकिन एफआईआर से 2015 से दस साल पुराने सारे प्रमाण नष्ट होने का खुलासा हुआ।
तीन मंजिला इमारत में पहली मंजिल तक सीमित बताई आग बुझाने में साढ़े तीन घंटे लगना भी सवाल खड़ा करता है। करीब 50 कंप्यूटर, सर्वर और डिजिटल रिकॉर्ड राख हो गए, जिससे हजारों आपराधिक मामलों के प्रमाण खत्म हो गए। केटीआर ने चेतावनी दी कि इससे खतरनाक अपराधी बच निकल सकते हैं।
“यह केवल राजनीतिक मुद्दा नहीं, जनसुरक्षा और न्याय व्यवस्था की निष्पक्षता पर प्रहार है,” उन्होंने कहा। दिल्ली के प्रभावशाली लोगों के कथित समर्थन से सीएम के काम करने का आरोप लगाते हुए केंद्र से हस्तक्षेप की मांग की। सेवानिवृत्त जज से जांच और पुलिस महानिदेशक को तथ्य सार्वजनिक करने की चुनौती दी।
केटीआर ने पुलिस के कुछ हिस्सों को सीएम की निजी फौज बताया। इस घटना ने तेलंगाना की कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं, और बीआरएस पूर्ण पारदर्शिता तक लड़ाई जारी रखेगी।