
बिजनेस रिकॉर्डर की एक रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान की वित्तीय नीतियां उत्पादक वर्ग का शोषण कर रही हैं। देश के 8.56 करोड़ कार्यबल में से केवल 34 लाख लोग टैक्स देते हैं। यह 4% अल्पसंख्यक वर्ग ही अरबों के घाटे और 9 ट्रिलियन रुपये के कर्ज की भरपाई कर रहा है। वेतनभोगी पेशेवरों पर 35% तक टैक्स लगाया जा रहा है, लेकिन उन्हें बिजली, सुरक्षा और शिक्षा जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए अलग से भुगतान करना पड़ता है। रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि यदि यही स्थिति रही, तो 2025 तक 8 लाख कुशल कामगार देश छोड़ सकते हैं।