
ढाका की सड़कों पर आग लगाने वाले उपद्रवी अपने देश से कोसों दूर बैठे थे। अमेरिका और फ्रांस में रहने वाले दो बांग्लादेशी ऑनलाइन कार्यकर्ताओं ने वैश्विक अभियान चलाकर प्रमुख मीडिया हाउस और सांस्कृतिक संस्थानों पर हमले करवाए। एक विस्तृत रिपोर्ट ने इस सनसनीखेज सच्चाई को उजागर किया है।
18 दिसंबर 2025 की आधी रात न्यूयॉर्क के जैक्सन हाइट्स से इलियास हुसैन ने फेसबुक पर लिखा, ‘प्रथम आलो की एक ईंट भी नहीं बचेनी चाहिए।’ उनके 22 लाख से अधिक फॉलोअर्स वाले अकाउंट को वेरिफाइड बैज ने और मजबूती दी। यह पोस्ट व्हाट्सएप, इंस्टाग्राम पर वायरल हो गई।
कुछ घंटों में ही प्रथम आलो के ढाका कार्यालय के बाहर उग्र भीड़ जमा हो गई और तोड़फोड़ शुरू कर दी। हुसैन ने पेरिस के पिनाकी भट्टाचार्य के साथ मिलकर ‘द डेली स्टार’, ‘छायानाट’ और ‘उदिची’ पर भी निशाना साधा। उनके संदेश लाखों तक पहुंचे, जिससे हिंसा फैली।
पिछले एक साल से ये दोनों प्रथम आलो और डेली स्टार पर भारत की खुफिया एजेंसियों से सांठगांठ का आरोप लगाते हुए अभियान चला रहे थे। 5 फरवरी 2025 को शेख हसीना के पैतृक घर को गिराने की घटना को उन्होंने हसीना के लाइव प्रसारण से जोड़कर उकसाया।
रिपोर्ट के अनुसार, प्रथम आलो में आग लगाते समय भीड़ ने खुलेआम हुसैन-भट्टाचार्य के नेतृत्व वाली सरकार की मांग की। दोनों ने अधिकारियों से सीधे संबंध बनाए थे। अगस्त 2024 में यूनुस सरकार आने के बाद पत्रकारों पर हमले और भीड़ संस्कृति बढ़ी है। यह सोशल मीडिया के दुरुपयोग का खतरनाक उदाहरण है।