
अलवर, राजस्थान में शनिवार को आयोजित महत्वपूर्ण सम्मेलन में केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने बाघ संरक्षण नीतियों में व्यापक बदलाव की वकालत की। टाइगर रेंज राज्यों के मुख्य वन्यजीव वार्डन और टाइगर रिजर्व फील्ड डायरेक्टर्स की इस दो दिवसीय बैठक का उद्घाटन करते हुए उन्होंने राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) की 28 बैठकों के सभी फैसलों की समीक्षा का आह्वान किया।
मंत्री ने कहा कि पुरानी नीतियों की पहचान आवश्यक है जो अब अप्रासंगिक हो चुकी हैं, जो लागू नहीं हो सकीं या जिनका पूर्ण क्रियान्वयन हो चुका है। इससे संरक्षण प्रयास वर्तमान चुनौतियों से मेल खाएंगे और जमीनी स्तर पर अधिक प्रभावी होंगे। भारत के बाघ संरक्षण के 50 वर्ष पूरे होने पर उन्होंने इसे आदर्श अवसर बताया।
पिछले पांच दशकों के निर्णयों को एक औपचारिक दस्तावेज में संकलित कर अगली एनटीसीए बैठक का प्रमुख एजेंडा बनाने का सुझाव दिया। सम्मेलन में राजस्थान के वन मंत्री संजय शर्मा, वरिष्ठ अधिकारी, राज्य वार्डन और रिजर्व प्रबंधक उपस्थित रहे।
बाघों की गणना, बचाव-पुनर्वास, मानव-वन्यजीव संघर्ष, फंड उपयोग और संरक्षण आधार मजबूत करने पर विस्तृत विमर्श होगा। चार वर्किंग ग्रुप बनाकर क्षेत्रीय मुद्दों, आबादी परिवर्तन और योजनाओं के मूल्यांकन का प्रस्ताव रखा।
एनटीसीए को वन्यजीव संस्थान, वनस्पति सर्वे, प्राणी सर्वे और वानिकी अनुसंधान परिषद से समन्वय बढ़ाने की सलाह दी। चीता पुनर्वास की सफलता पर जोर देते हुए कहा कि तीसरी पीढ़ी जन्म ले चुकी है, बोत्सवाना से नया जत्था शीघ्र आने वाला है।
पीएम मोदी के नेतृत्व में आईबीसीए में 24 देश सदस्य हैं, वैश्विक एजेंसियां जुड़ रही हैं। बजट में ग्लोबल बिग कैट समिट की घोषणा हुई। बाघों के कोर क्षेत्र से बाहर निकलने पर मजबूत प्रतिक्रिया तंत्र जरूरी।
घायल जानवरों, संघर्ष और अनाथ शावकों के लिए स्पष्ट ढांचा बने। उन्होंने ‘स्ट्राइप्स’ जर्नल जारी की और पेंटिंग प्रतियोगिता के विजेताओं को सम्मानित किया। सम्मेलन 2026 बाघ गणना, गश्त, प्रबंधन, फंड और मौत मामलों पर केंद्रित रहेगा।