
टी20 क्रिकेट को बल्लेबाजों का दबंगेपन माना जाता है, लेकिन एकता बिष्ट जैसी गेंदबाजों ने अपनी चतुराई से इतिहास रच दिया। 8 फरवरी 1986 को उत्तराखंड के अलमोड़ा में जन्मीं एकता ने मात्र छह साल की उम्र में क्रिकेट संभाला। उस दौर में उत्तराखंड में लड़कियों का क्रिकेट खेलना सपना था, इसलिए वे लड़कों के साथ मैदान साझा करती रहीं।
घरेलू स्तर पर उत्तर प्रदेश की ओर से चमकी एकता ने 23 जून 2011 को ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ टी20 अंतरराष्ट्रीय डेब्यू किया। जल्द ही वनडे और टेस्ट में भी कदम रखा। करियर का स्वर्णिम पल 3 अक्टूबर 2012 को आया, जब महिला टी20 विश्व कप में श्रीलंका के खिलाफ हैट्रिक लेकर वे भारत की पहली टी20आई हैट्रिक लेने वाली गेंदबाज बनीं। पुरुषों में यह कमाल दीपक चाहर ने बाद में किया।
बाएं हाथ की स्पिनर एकता ने एक टेस्ट में 3, 63 वनडे में 98 तथा 42 टी20 में 53 विकेट झटके। 2017 वनडे विश्व कप फाइनल में अहम भूमिका निभाई, खासकर पाकिस्तान के खिलाफ 5 विकेट से जीत दिलाई। 2024 महिला प्रीमियर लीग में आरसीबी ने उन्हें चुना।
40 के करीब पहुंच रही एकता ने औपचारिक संन्यास नहीं लिया, लेकिन 18 फरवरी 2022 के बाद कोई अंतरराष्ट्रीय मुकाबला नहीं खेला। लीग और घरेलू क्रिकेट में सक्रिय रहकर नई पीढ़ी को प्रेरित कर रही हैं। उनकी कहानी महिला क्रिकेट के उभार की प्रतीक है।