
रावलपिंडी की एंटी-टेररिज्म कोर्ट ने पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ के संस्थापक इमरान खान की मेडिकल याचिका को खारिज कर दिया। जेल में अपने निजी चिकित्सकों से मिलने और जांच कराने की मांग करने वाले पूर्व प्रधानमंत्री को कोर्ट ने जेल नियमों का हवाला देकर यह इजाजत देने से इंकार कर दिया। अदालत का कहना था कि इमरान को उचित चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पीटीआई ने अब सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर कर दी है, जिसमें परिवार और डॉक्टरों से मुलाकात की मांग दोहराई गई। इमरान के वकील ने बहस में जोर दिया कि वे जीएचक्यू हमले के मामले में जमानत पर हैं और विचाराधीन कैदी हैं, न कि दोषी। अभियोजक ने पलटवार किया कि जेल नियम निजी डॉक्टरों की अनुमति नहीं देते।
हाल ही में इस्लामाबाद के पीआईएमएस में इमरान का आंखों का इलाज हुआ, जहां रक्त वाहिकाओं के दबाव से दृष्टि प्रभावित होने की पुष्टि हुई। पीटीआई सरकार पर मेडिकल जानकारी छिपाने का आरोप लगा रही है। नेशनल असेंबली में विपक्ष नेता महमूद अचकजई ने पीएम शहबाज शरीफ से हस्तक्षेप की मांग की, ताकि विश्वसनीय डॉक्टर जांच करें।
परिवार का कहना है कि उनके निजी डॉक्टर को एक साल से अधिक समय से इमरान से मिलने नहीं दिया गया। अडियाला जेल प्रशासन ने स्पष्ट किया कि ‘बी-क्लास’ कैदी के रूप में इमरान को सभी सुविधाएं- पसंदीदा भोजन, स्वास्थ्य सेवा, पढ़ाई का सामान, व्यायाम मिल रही हैं।
अगस्त 2023 से जेल में इमरान का दावा है कि 2022 के वोट से हटाए जाने के बाद ये केस राजनीतिक साजिश हैं। यह फैसला पाकिस्तानी राजनीति में तनाव को और बढ़ा सकता है।