
नई दिल्ली। भारत और अमेरिका के बीच शनिवार को घोषित द्विपक्षीय व्यापार समझौते के अंतरिम ढांचे का हेल्थ इंडस्ट्री के नेताओं ने जोरदार स्वागत किया है। यह कदम भारतीय निर्यात के लिए अमेरिकी टैरिफ की जंजीरों को ढीला करने वाला साबित हो सकता है।
इस ढांचे के अनुसार, अमेरिका भारतीय वस्तुओं पर टैरिफ को 18 प्रतिशत तक कम करेगा। विशेष रूप से जेनेरिक दवाओं, रत्न-हीरों और विमान पुर्जों पर कोई टैरिफ नहीं लगेगा। सूत्रों के मुताबिक, यह अन्य देशों की तुलना में भारत को सबसे अनुकूल व्यवस्था प्रदान करता है।
भारतीय मेडिकल डिवाइस एसोसिएशन (एआईएमईडी) के राजीव नाथ ने कहा कि व्यापार बाधाओं पर संयुक्त बयान सराहनीय है। उन्होंने बताया कि अमेरिकी उपकरणों को सीडीएससीओ लाइसेंस तेजी से मिलता है, जबकि भारतीय कंपनियों को कठोर जांच का सामना करना पड़ता है। अमेरिका से आयात 14,000 करोड़ रुपये का है, जो चीन के 12,000 करोड़ से अधिक है। पिछले वर्ष भारत का अमेरिका को निर्यात 750 मिलियन डॉलर और आयात 1.6 बिलियन डॉलर रहा।
नाथ ने अमेरिकी एफडीए की एसीएसए प्रयोगशालाओं को प्राथमिकता देने पर असंतुलन की ओर इशारा किया। भारतीय मेडटेक को चीनी डंपिंग, यूरोपीय संघ की देरी, जापान की येन कमजोरी, इंडोनेशिया के भेदभाव और सीडीएससीओ बाधाओं का सामना है। उन्होंने दोनों देशों में निष्पक्षता की मांग की ताकि व्यापार नवाचार को बढ़ावा दे।
फार्मास्यूटिकल्स पर अमेरिकी धारा 232 जांच के परिणामस्वरूप जेनेरिक दवाओं को लाभ मिलेगा। इंडियन फार्मास्यूटिकल अलायंस के सुदर्शन जैन ने कहा कि दवा साझेदारी मजबूत होनी चाहिए क्योंकि दवाओं की सुरक्षा राष्ट्रीय सुरक्षा का हिस्सा है। जेनेरिक पर कोई टैरिफ नहीं और जांच मुक्त व्यापार मानकों के अनुरूप है।
यह अंतरिम समझौता स्वास्थ्य व्यापार में नई गति लाएगा, जिससे दोनों देशों के उपभोक्ताओं को सस्ती दवाएं और बेहतर नवाचार मिलेगा। पूर्ण समझौते की प्रतीक्षा में उद्योग उत्साहित है।