
नई दिल्ली। अपना आईपीओ लाने की कवायद में जुटी नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) ने वित्त वर्ष 2026 की तीसरी तिमाही के आंकड़े जारी किए हैं। कंपनी का शुद्ध मुनाफा अक्टूबर-दिसंबर में सालाना आधार पर 37 प्रतिशत लुढ़ककर 2,408 करोड़ रुपये रह गया। पिछली साल इसी तिमाही में यह 3,834 करोड़ रुपये था।
हालांकि तिमाही आधार पर मुनाफे में 15 प्रतिशत की तेजी आई है, जो सितंबर तिमाही के 2,098 करोड़ रुपये से बेहतर है। कुल आय सालाना 9 प्रतिशत घटकर 4,395 करोड़ रुपये पर सिमट गई, लेकिन तिमाही आधार पर 6 प्रतिशत बढ़ी।
ऑपरेटिंग ईबीआईटीडीए में भी 16 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जो 2,851 करोड़ रुपये रही। बाजार की उतारचढ़ाव के बावजूद एनएसई के प्लेटफॉर्म पर कंपनियों ने इक्विटी, डेट और बिजनेस ट्रस्ट के जरिए 5.4 लाख करोड़ रुपये जुटाए।
मेनबोर्ड और एसएमई प्लेटफॉर्म पर कुल 65 कंपनियों ने 96,457 करोड़ रुपये के आईपीओ लॉन्च किए, जो पिछली तिमाही से दोगुने और चार तिमाहियों का उच्चतम है। वित्त वर्ष के पहले नौ महीनों में सात नगर निगमों ने 750 करोड़ रुपये जुटाए, जो 2015 के सेबी नियमों के बाद का रिकॉर्ड है।
सेबी से एनओसी मिलने के बाद यह एनएसई के नतीजे हैं। एमडी आशीषकुमार चौहान ने कहा कि डीआरएचपी तैयार करने में 3-4 माह लगेंगे। उन्होंने सेबी का शुक्रिया अदा किया, जो 10 साल बाद आईपीओ की मंजूरी देगा।
एनएसई आईपीओ बाजार के लिए बड़ा झटका साबित हो सकता है, जो निवेशकों को अपनी मजबूत स्थिति का भरपूर लाभ देगा। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि मुनाफे में गिरावट अस्थायी है।
