
नई दिल्ली। भारतीय मोशन पिक्चर प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन (आईएमपीपीए) ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कंपनियों के लिए प्रस्तावित ‘हाइब्रिड कॉपीराइट लाइसेंसिंग फ्रेमवर्क’ के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है। एसोसिएशन ने सरकार को पत्र लिखकर इस योजना पर पुनर्विचार की मांग की है, जो फिल्मों, संगीत और अन्य रचनात्मक सामग्री को बिना अनुमति एआई ट्रेनिंग में इस्तेमाल करने की इजाजत देती है।
आईएमपीपीए का स्पष्ट कहना है कि यह फ्रेमवर्क रचनाकारों के मूल अधिकारों को कमजोर करेगा। सदस्यों और प्रमुख हितधारकों के साथ विस्तृत बातचीत के बाद एसोसिएशन ने 19 जनवरी के पत्र में इसे पूरी तरह अस्वीकार्य बताया।
रचनात्मक उद्योग की लंबी अवधि की स्थिरता पर यह खतरा मंडरा रहा है। विश्व स्तर पर स्वीकार किया जा रहा है कि रचनात्मक सामग्री तकनीकी कंपनियों के लिए मुफ्त संसाधन नहीं है। यह लेखकों, कलाकारों, निर्देशकों और प्रोड्यूसर्स की कठिन परिश्रम, निवेश और कानूनी स्वामित्व का परिणाम है।
कई देशों में बिना अनुमति एआई ट्रेनिंग के खिलाफ कानूनी कार्रवाइयां चल रही हैं। नीति निर्माता पारदर्शिता, सहमति और उचित मुआवजे पर बल दे रहे हैं। जहां डेटा माइनिंग की छूट है, वहां भी यह सीमित है और मौजूदा लाइसेंस बाजार को प्रभावित नहीं करती।
आईएमपीपीए ने चेताया कि भारत में पाइरेसी की भयानक समस्या पहले से मौजूद है, जो फिल्म उद्योग को अरबों का नुकसान पहुंचा रही है। निवेशकों का भरोसा घट रहा है। एआई के लिए ऐसा ढांचा लाना रचनाकारों के लिए घातक साबित होगा।
कानूनी सजा का डर ही एआई डेवलपर्स को लाइसेंस लेने के लिए प्रेरित कर सकता है। एसोसिएशन ने रचनाकारों के अधिकार मजबूत रखते हुए स्वैच्छिक लाइसेंसिंग को बढ़ावा देने की अपील की है। इससे नवाचार भी फलेगा।
