
गांधीनगर। गुजरात सरकार ने माताओं और छोटे बच्चों के पोषण व स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने के लिए एक विशेष अभियान चलाया, जिसमें 5.14 लाख से अधिक नए लाभार्थियों को आंगनवाड़ी योजनाओं से जोड़ा गया। नवंबर 2025 से जनवरी 2026 तक चले इस अभियान ने गर्भवती महिलाओं, स्तनपान कराने वाली माताओं और छह वर्ष तक के बच्चों को लक्ष्य बनाया।
आदिवासी और ग्रामीण क्षेत्रों में सबसे अधिक पंजीकरण हुए, जहां पहले सेवाओं की कमी थी। आंकड़ों के मुताबिक, 2.55 लाख आदिवासी, 2.07 लाख ग्रामीण और 51 हजार शहरी लाभार्थी अब पूरक पोषण, विकास निगरानी और स्वास्थ्य सहायता प्राप्त करेंगे।
महिला एवं बाल विकास मंत्री मनीषा वकील के मार्गदर्शन में जिला प्रशासनों ने सूक्ष्म नियोजन किया। आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं ने घर-घर जाकर योग्य परिवारों की पहचान की और उन्हें नेटवर्क से जोड़ा।
टेको सॉफ्टवेयर के माध्यम से डिजिटल ट्रैकिंग और क्षेत्रीय सत्यापन ने डुप्लीकेशन रोका तथा डेटा की शुद्धता सुनिश्चित की। इस प्रयास से दूरस्थ इलाकों तक सेवाएं पहुंचीं।
यह विस्तार गुजरात की कल्याणकारी प्रतिबद्धता को दर्शाता है, जो हर मां-बच्चे को बेहतर भविष्य प्रदान करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। राज्य अब समावेशी विकास का अनुकरणीय मॉडल प्रस्तुत कर रहा है।