
उत्तर भारत में फरवरी का मौसम सुहाना तो है, लेकिन स्वास्थ्य के लिए जोखिम भरा भी। दिन की धूप और रात की ठंड का मेल शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को कमजोर कर देता है। इस ऋतु परिवर्तन में वायरल संक्रमण, खांसी-जुकाम और बुखार के मामले तेजी से बढ़ते हैं।
लोग हल्के कपड़े पहनने और ठंडे पेय लेने लगते हैं, जो सबसे बड़ी भूल है। पहाड़ी हवाओं और तेज धूप से बैक्टीरिया-पैथोजन पनपते हैं, जिससे होली तक अस्पताल भर जाते हैं।
आयुर्वेद इस दौरान गिलोय-तुलसी काढ़ा पीने की सलाह देता है। इसे अमृत माना जाता है, जो संक्रमण से बचाता है। सुबह खाली पेट इसका सेवन करें।
सोंठ-शहद का मिश्रण गले की खराश और कफ दूर करता है। गुनगुना पानी पिएं, फ्रिज का पानी, दही-आइसक्रीम त्यागें। गर्म तासीर का भोजन लें और गर्म कपड़े न छोड़ें।
इन उपायों से आप मौसमी बीमारियों से सुरक्षित रहेंगे, स्वस्थ जीवन जिएंगे।