
केरल की राजधानी तिरुवनंतपुरम अब भारतीय जनता पार्टी का सबसे मजबूत गढ़ बन चुका है। नगर निगम चुनावों में ऐतिहासिक जीत हासिल कर भाजपा ने सीपीआई(एम) के नेतृत्व वाले वाम मोर्चा के 40 साल से अधिक पुराने राज को उखाड़ फेंका है। 101 सदस्यीय निगम में भाजपा को 50 सीटें मिलीं, जबकि वाम मोर्चा को 29 और कांग्रेस नीत यूडीएफ को 20 सीटें प्राप्त हुईं। एक निर्दलीय ने बाद में भाजपा को समर्थन दिया, जिससे बहुमत का आंकड़ा 51 हो गया।
यह जीत केवल स्थानीय स्तर की नहीं, बल्कि वर्षों की संगठनात्मक मेहनत का परिणाम है। जिले के 14 विधानसभा क्षेत्रों को भाजपा अब अपनी रणनीति का केंद्र बना रही है। 2011 में एक, 2016 में दो और 2021 में चार सीटों पर दूसरे स्थान तक पहुंचकर पार्टी ने अपनी प्रगति दिखाई है। दूसरी तरफ कांग्रेस की हालत पतली होती गई- आठ से घटकर एक सीट बची।
निकाय चुनावों का मतदान पैटर्न यदि विधानसभा में दोहराया गया तो भाजपा कई सीटें जीत सकती है, खासकर कांग्रेस के गढ़ों पर। राज्य अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर ने नेमोम से चुनाव लड़ने का ऐलान किया है, जहां भाजपा 2016 में सफल हुई थी। कझाकूटम, वट्टियूरकावु और अटिंगल भी निशाने पर हैं।
इस जीत ने पार्टी में नई जान डाल दी है। अब सिर्फ विधानसभा में कदम रखने की बात नहीं, बल्कि वाम और कांग्रेस के लंबे दबदबे को समाप्त करने का संकल्प है। राज्य की सियासत में बड़ा परिवर्तन संभव नजर आ रहा है।