
अयोध्या में नेटफ्लिक्स की प्रस्तावित फिल्म ‘घूसखोर पंडत’ के टाइटल ने धार्मिक संतों और महंतों में भारी आक्रोश पैदा कर दिया है। प्रमुख संतों ने इसे समाज में नफरत फैलाने वाला और सामाजिक एकता को चोट पहुंचाने वाला करार दिया है।
साकेत भवन मंदिर के महंत सीताराम दास महाराज ने कड़ी नाराजगी जताते हुए कहा कि किसी समुदाय को निशाना बनाकर अपमानजनक शब्द जोड़ना घोर निंदनीय है। ‘यह शब्द समाज को गलत नजरिए से देखने को प्रोत्साहित करता है। अगर भ्रष्टाचार दिखाना था तो दूसरे समुदायों में क्यों नहीं?’ उन्होंने सवाल किया।
ब्राह्मण समाज की सहनशीलता का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि शांतिप्रिय समुदाय को टारगेट करना दुर्भाग्यपूर्ण है। दूसरी ओर, हनुमान गढ़ी के महंत डॉ. देवेशाचार्य ने सेंसर बोर्ड पर सवाल ठोकते हुए मांग की कि ऐसी विभाजनकारी फिल्मों पर रोक लगे। ‘निर्माताओं को ब्राह्मण समाज से माफी मांगनी चाहिए और सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।’
हनुमानगढ़ी के संत अमित दास ने भी फिल्म को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए प्रदर्शन पर तत्काल प्रतिबंध की मांग की। ‘यह नफरत फैलाएगी, सेंसर बोर्ड जिम्मेदारी निभाए।’
यह विवाद मीडिया और धार्मिक भावनाओं के बीच तनाव को उजागर कर रहा है। संतों ने चेतावनी दी कि बिना सुधार के विरोध तेज होगा, जो सांस्कृतिक संवेदनशीलता पर बहस छेड़ सकता है।